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लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर कैसे बेचें: तरीका, सही समय और टैक्स नियम

Blog by Aliceblue News Desk

26 October 2026

आप लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर तब बेच सकते हैं, जब शेयर आपके डीमैट अकाउंट में आ जाएं और स्टॉक की ट्रेडिंग शुरू हो जाए।

बेचने से पहले लिस्टिंग प्राइस देखें, उसकी तुलना आईपीओ के इश्यू प्राइस से करें, कीमत पर बेहतर कंट्रोल के लिए लिमिट ऑर्डर चुनें और शेयर बेचने की मंजूरी पहले से तैयार रखें।

अगर आप लिस्टिंग के दिन मुनाफे में शेयर बेचते हैं, तो यह मुनाफा आमतौर पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। सेक्शन 111A की शर्तें लागू होने पर इस पर आमतौर पर 20% टैक्स के साथ लागू सरचार्ज और सेस भी देना पड़ सकता है।

विषय सूची

  1. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचना क्या होता है?
  2. आईपीओ लिस्टिंग गेन क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
  3. लिस्टिंग से पहले क्या-क्या चेक करें?
  4. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने का तरीका
  5. आईपीओ लिस्टिंग डे का समय: प्री-ओपन सेशन को समझें
  6. लिस्टिंग के दिन मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर में अंतर
  7. लिस्टिंग के दिन आईपीओ की कीमत इतनी तेजी से क्यों बदलती है?
  8. आईपीओ लिस्टिंग गेन और नुकसान का उदाहरण
  9. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने पर टैक्स
  10. आईपीओ लिस्टिंग गेन को आईटीआर में कैसे दिखाएं?
  11. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने की मुख्य बातें
  12. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने के फायदे
  13. आईपीओ शेयर तुरंत बेचने के नुकसान
  14. नए निवेशकों के लिए जरूरी बातें
  15. लिस्टिंग के दिन बेचें या शेयर होल्ड करें?
  16. आईपीओ बेचने की अलग-अलग स्ट्रैटेजी
  17. आम गलतियां जिनसे बचना चाहिए
  18. आईपीओ बेचने से जुड़े जरूरी शब्द
  19. लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर किसे बेचने चाहिए?
  20. निष्कर्ष
  21. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आईपीओ लिस्टिंग गेन क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने का मतलब है कि आपने आईपीओ में जो शेयर पाए हैं, उन्हें उसी दिन बेच देना जिस दिन उनकी ट्रेडिंग पहली बार एनएसई या बीएसई पर शुरू होती है।

आईपीओ तब होता है जब कोई कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर खरीदने का मौका देती है।

अगर आपको आईपीओ में शेयर मिलते हैं, तो लिस्टिंग से पहले वे आपके डीमैट अकाउंट में आ जाते हैं। ट्रेडिंग शुरू होने के बाद आप उन्हें बेच सकते हैं।

कई निवेशक लिस्टिंग गेन कमाने के लिए पहले दिन ही शेयर बेच देते हैं। लिस्टिंग गेन वह मुनाफा होता है जो तब मिलता है जब स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से ऊपर लिस्ट होता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपको शेयर ₹300 में मिला और आपने उसे ₹390 में बेच दिया, तो टैक्स और दूसरे खर्चों से पहले आपका मुनाफा ₹90 प्रति शेयर होगा।

सेबी की 2024 की एक स्टडी के अनुसार, एंकर निवेशकों को छोड़कर 54% आईपीओ शेयर एक हफ्ते के अंदर बेच दिए गए थे। इससे पता चलता है कि कई निवेशक कम समय में मुनाफा कमाने के लिए आईपीओ में निवेश करते हैं।

लिस्टिंग से पहले क्या-क्या चेक करें?

लिस्टिंग का दिन शुरू होने से पहले इन बातों को जरूर चेक करें:

  • शेयर आपके डीमैट अकाउंट में दिखाई दे रहे हों: आप शेयर तभी बेच सकते हैं जब वे आपके अकाउंट में आ चुके हों।
  • आपका ट्रेडिंग अकाउंट चालू हो: यह पक्का करें कि आप लॉग इन करके ऑर्डर लगा सकते हैं।
  • शेयर बेचने की मंजूरी तैयार हो: आपको सीडीएसएल टीपिन, ओटीपी या डीडीपीआई के जरिए मंजूरी देनी पड़ सकती है।
  • आईपीओ का इश्यू प्राइस पता हो: इससे आप अपना मुनाफा या नुकसान आसानी से निकाल सकते हैं।
  • बेचने की कम से कम कीमत तय हो: पहले से सोच लें कि आप किससे कम कीमत पर शेयर नहीं बेचना चाहते।
  • टैक्स की जानकारी हो: लिस्टिंग के दिन हुआ मुनाफा आमतौर पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।
  • सिर्फ जीएमपी पर भरोसा न करें: ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी आधिकारिक आंकड़ा नहीं होता और लिस्टिंग से पहले बदल सकता है।

आईपीओ में आवेदन करने से पहले मांग को समझना चाहते हैं, तो आईपीओ सब्सक्रिप्शन का मतलब पढ़ सकते हैं।

आप आईपीओ में जीएमपी के बारे में भी पढ़ सकते हैं, लेकिन इसे केवल एक संकेत मानें, पक्की गारंटी नहीं।

आईपीओ के लिए आवेदन की योजना बना रहे हैं? स्मार्ट आईपीओ देखें

अगर आप अक्सर आईपीओ आवेदन की आखिरी तारीख भूल जाते हैं या बार-बार सब्सक्रिप्शन लेवल चेक नहीं करना चाहते, तो एलिस ब्लू का स्मार्ट आईपीओ आपकी मदद कर सकता है।

इसमें आप आईपीओ की कैटेगरी, लॉट साइज, यूपीआई आईडी और सब्सक्रिप्शन की अपनी शर्त तय कर सकते हैं।

स्मार्ट आईपीओ आपके लिए योग्य मेनबोर्ड आईपीओ पर नजर रखता है। आपकी चुनी हुई शर्त पूरी होने पर आवेदन अपने आप लगाया जाता है और आपके बैंक ऐप में यूपीआई मंजूरी का अनुरोध आता है।

स्मार्ट आईपीओ अभी एनएसई और बीएसई पर लिस्ट होने वाले मेनबोर्ड आईपीओ को सपोर्ट करता है।

यह आईपीओ पर नजर रखने और सही समय पर आवेदन करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है, लेकिन निवेश करना है या नहीं, इसका फैसला आपका ही रहता है।

आपको यूपीआई मंजूरी खुद देनी होती है और आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसा होना जरूरी है।

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने का तरीका

अगर आप सही तरीके से मार्केट खुलने की प्रक्रिया को समझते हैं, तो आईपीओ का मुनाफा बुक करना आसान हो सकता है।

1. अपनी होल्डिंग चेक करें -

अपने ट्रेडिंग ऐप में लॉग इन करें और होल्डिंग सेक्शन खोलें।

शेयर तभी बेचें जब आईपीओ के शेयर आपके डीमैट अकाउंट की होल्डिंग में दिखाई दे रहे हों। सिर्फ अलॉटमेंट मिलने का मैसेज काफी नहीं है।

2. लिस्टिंग प्राइस चेक करें -

लिस्टिंग प्राइस वह कीमत होती है जिस पर स्टॉक पहली बार एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू करता है।

इसकी तुलना अपने आईपीओ इश्यू प्राइस से करें। इससे पता चलेगा कि आपको मुनाफा हो रहा है या नुकसान।

3. तय करें कितने शेयर बेचने हैं -

आप:

  • सभी शेयर बेच सकते हैं,
  • कुछ शेयर बेच सकते हैं,
  • या सभी शेयर होल्ड कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आपको 50 शेयर मिले हैं, तो आप 25 शेयर बेचकर बाकी 25 लंबे समय के लिए रख सकते हैं।

4. लिमिट सेल ऑर्डर लगाएं -

नए निवेशकों के लिए आमतौर पर लिमिट ऑर्डर, मार्केट ऑर्डर से बेहतर हो सकता है।

लिमिट ऑर्डर में आप वह कम से कम कीमत तय करते हैं जिस पर शेयर बेचना चाहते हैं। इससे तेजी से बदलती कीमत में आपको बेहतर कंट्रोल मिलता है।

5. शेयर बेचने की मंजूरी दें और बिक्री चेक करें -

शेयर बेचने से पहले आपका ब्रोकर सीडीएसएल टीपिन, ओटीपी या दूसरी मंजूरी मांग सकता है।

ऑर्डर पूरा होने के बाद कॉन्ट्रैक्ट नोट जरूर देखें। इसमें बेचने की कीमत, चार्ज और दूसरी जानकारी होती है।

आपका असली मुनाफा चार्ज और टैक्स काटने के बाद निकलता है।

आईपीओ लिस्टिंग डे का समय: प्री-ओपन सेशन को समझें

लिस्टिंग के पहले दिन आईपीओ स्टॉक्स सामान्य लिस्टेड शेयरों की तरह सीधे नहीं खुलते।

एनएसई आईपीओ और एसएमई आईपीओ के लिए पहले दिन एक खास प्री-ओपन सेशन रखता है।

समय

क्या होता है?

नए निवेशकों को क्या पता होना चाहिए?

सुबह 9:00 से 9:45

ऑर्डर लगाना, बदलना और कैंसिल करना

इस खास प्री-ओपन सेशन में केवल लिमिट ऑर्डर स्वीकार किए जाते हैं

सुबह 9:45 से 9:55

ऑर्डर मिलान और ओपनिंग प्राइस तय करना

मांग और सप्लाई के आधार पर ओपनिंग प्राइस तय होता है

सुबह 9:55 से 10:00

बीच का समय

स्टॉक प्री-ओपन से सामान्य मार्केट में जाता है

सुबह 10:00 के बाद

सामान्य ट्रेडिंग

अब आप सामान्य लिस्टेड स्टॉक की तरह ट्रेड कर सकते हैं

एनएसई के अनुसार, इस खास प्री-ओपन सेशन में केवल लिमिट ऑर्डर ही लगाए जा सकते हैं।

ओपनिंग प्राइस उस कीमत के आधार पर तय होता है जहां सबसे ज्यादा खरीद और बिक्री की मात्रा मिल सकती है।

लिस्टिंग के दिन मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर में अंतर

ऑर्डर का प्रकार

मतलब

किसके लिए बेहतर

खतरा

मार्केट ऑर्डर

उस समय मौजूद सबसे अच्छी कीमत पर तुरंत बेचता है

जल्दी बाहर निकलने के लिए

कीमत उम्मीद से कम मिल सकती है

लिमिट ऑर्डर

आपकी तय कीमत या उससे बेहतर कीमत पर ही बेचता है

कीमत पर कंट्रोल के लिए

ऑर्डर पूरा न हो

पार्शियल सेल ऑर्डर

केवल कुछ शेयर बेचता है

बीच का रास्ता

बाकी शेयर बाद में गिर सकते हैं

प्री-ओपन लिमिट ऑर्डर

सामान्य ट्रेडिंग से पहले लगाया गया लिमिट ऑर्डर

पहले से बेचने की योजना के लिए

ओपनिंग प्राइस अभी भी बदल सकता है

नए निवेशकों के लिए लिमिट ऑर्डर संभालना आमतौर पर आसान होता है।

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹380 से कम में शेयर नहीं बेचना चाहते, तो ₹380 का लिमिट सेल ऑर्डर लगाने पर आपके शेयर उससे कम कीमत पर नहीं बिकेंगे।

लिस्टिंग के दिन आईपीओ की कीमत इतनी तेजी से क्यों बदलती है?

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर की कीमत तेजी से ऊपर-नीचे होना सामान्य बात है। पहले दिन खरीदने और बेचने वालों की संख्या ज्यादा होती है, इसलिए कीमत बहुत तेजी से बदल सकती है।

  • बड़े निवेशकों की बिक्री: अगर आईपीओ अच्छे प्रीमियम पर लिस्ट होता है, तो बड़े निवेशक मुनाफा बुक करने के लिए कुछ शेयर बेच सकते हैं। इससे बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ती है और कीमत गिर सकती है।
  • रिटेल निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग: कई छोटे निवेशक सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए आईपीओ में आवेदन करते हैं। अगर वे लिस्टिंग के तुरंत बाद बड़ी संख्या में शेयर बेचते हैं, तो स्टॉक की कीमत पर दबाव आ सकता है।
  • कम समय की ट्रेडिंग: लिस्टिंग के दिन कई ट्रेडर्स कीमत के तेज उतार-चढ़ाव से जल्दी मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। इससे कीमत और तेजी से बदल सकती है।
  • कंपनी से जुड़ी खबरें: लिस्टिंग के आसपास कंपनी के कारोबार या सरकारी नियमों से जुड़ी कोई नई खबर शेयर की कीमत पर असर डाल सकती है।
  • पूरे बाजार का माहौल: अच्छा आईपीओ भी कमजोर बाजार में दबाव में आ सकता है।
  • एफआईआई और डीआईआई की खरीद-बिक्री: बड़े संस्थागत निवेशकों की खरीद या बिक्री भी मांग पर बड़ा असर डाल सकती है।
  • आईपीओ की कीमत: अगर निवेशकों को इश्यू प्राइस सही लगता है तो मांग बनी रह सकती है। अगर कीमत ज्यादा लगती है तो लिस्टिंग के बाद बिक्री बढ़ सकती है।

ध्यान रखें: लिस्टिंग के दिन कीमत में तेज बदलाव सिर्फ उस समय बाजार की सोच दिखाता है। इससे हमेशा यह तय नहीं होता कि कंपनी लंबे समय में कैसा करेगी।

उदाहरण से समझें

मान लेते हैं कि राहुल ने टाटा टेक्नोलॉजीज आईपीओ में आवेदन किया और उसे 30 शेयरों का 1 लॉट मिला।

जानकारी

रकम

आईपीओ इश्यू प्राइस

₹500 प्रति शेयर

मिले हुए शेयर

30 शेयर

कुल निवेश

₹15,000

लिस्टिंग के दिन बेचने की कीमत

₹1,200 प्रति शेयर

कुल बिक्री

₹36,000

कुल मुनाफा

₹21,000

कुल मुनाफे का फॉर्मूला

कुल मुनाफा = (बेचने की कीमत – आईपीओ इश्यू प्राइस) × शेयरों की संख्या

इस उदाहरण में:

कुल मुनाफा = (₹1,200 – ₹500) × 30 = ₹21,000

मान लेते हैं कि राहुल लगभग ₹300 ब्रोकरेज, एक्सचेंज चार्ज और दूसरे खर्चों में देता है।

अब आसान गणना के लिए शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाते हैं।

20% की दर से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स:

₹21,000 × 20% = ₹4,200

टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस:

₹4,200 × 4% = ₹168

कुल टैक्स:

₹4,200 + ₹168 = ₹4,368

लगभग अंतिम मुनाफा:

₹21,000 – ₹300 – ₹4,368 = ₹16,332

असली आईपीओ लिस्टिंग गेन का फॉर्मूला

असली आईपीओ लिस्टिंग गेन = कुल मुनाफा – ट्रेडिंग चार्ज – एसटीसीजी टैक्स – सेस

यह उदाहरण दिखाता है कि सिर्फ लिस्टिंग प्राइस देखकर मुनाफा नहीं निकालना चाहिए। टैक्स और दूसरे खर्च काटने के बाद असली मुनाफा देखना जरूरी है।

नुकसान का उदाहरण

अब मान लेते हैं कि वही शेयर इश्यू प्राइस से नीचे चले जाते हैं और राहुल उन्हें बेच देता है।

जानकारी

रकम

आईपीओ इश्यू प्राइस

₹500

बेचने की कीमत

₹450

प्रति शेयर नुकसान

₹50

बेचे गए शेयर

30

कुल नुकसान

₹1,500

कुल नुकसान = (₹450 – ₹500) × 30 = ₹1,500

यहां राहुल ने नुकसान में शेयर बेचे हैं, इसलिए मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

इस नुकसान को शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस माना जाएगा और टैक्स नियमों के अनुसार इसे कुछ योग्य कैपिटल गेन के साथ एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को अपनी ट्रेडिंग से जुड़े रिकॉर्ड संभालकर रखने चाहिए और आईटीआर भरते समय नए टैक्स नियम जरूर चेक करने चाहिए।

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने पर टैक्स

अगर आप लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचते हैं, तो आपने शेयर 12 महीने के अंदर बेचे हैं।

लिस्टेड इक्विटी शेयरों के लिए इसे टैक्स के हिसाब से शॉर्ट-टर्म माना जाता है।

इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, सेक्शन 111A के तहत आने वाले लिस्टेड शेयरों के योग्य शॉर्ट-टर्म गेन पर, अगर शेयर बेचते समय एसटीटी दिया गया है, तो 20% टैक्स लगता है।

23 जुलाई 2024 से पहले यह दर 15% थी।

इसके साथ लागू सरचार्ज और हेल्थ व एजुकेशन सेस भी देना पड़ सकता है।

आईपीओ शेयरों के टैक्स का सार

शेयर कितने समय रखे?

गेन का प्रकार

टैक्स

लिस्टिंग के दिन बेचा

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

सेक्शन 111A लागू होने पर आमतौर पर 20% + सरचार्ज + सेस

12 महीने के अंदर बेचा

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

सेक्शन 111A लागू होने पर आमतौर पर 20% + सरचार्ज + सेस

12 महीने बाद बेचा

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

शर्तें पूरी होने पर ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5% + सरचार्ज + सेस

सीबीडीटी के 2024 के एफएक्यू के अनुसार, लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए होल्डिंग पीरियड 1 साल है।

23 जुलाई 2024 से सेक्शन 111A की दर 15% से बढ़कर 20% और सेक्शन 112A की दर 10% से बढ़कर 12.5% हो गई।

आईपीओ लिस्टिंग गेन को आईटीआर में कैसे दिखाएं?

अगर आप आईपीओ शेयर बेचकर मुनाफा या नुकसान करते हैं, तो इसे इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कैपिटल गेन में दिखाना चाहिए।

कई ऐसे आम निवेशक जिनकी कमाई में कैपिटल गेन है लेकिन बिजनेस इनकम नहीं है, उनके लिए आमतौर पर आईटीआर-2 इस्तेमाल किया जाता है।

अगर आपकी बिजनेस इनकम है या आपकी ट्रेडिंग इनकम को बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

सही आईटीआर आपकी कमाई के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर समझ न आए तो टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।

इन चीजों का रिकॉर्ड संभालकर रखें:

  • आईपीओ अलॉटमेंट प्राइस
  • मिले हुए शेयरों की संख्या
  • बेचने की कीमत
  • बिक्री की तारीख
  • कॉन्ट्रैक्ट नोट
  • ब्रोकरेज और दूसरे चार्ज
  • ब्रोकर की कैपिटल गेन स्टेटमेंट
  • एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी एआईएस

मुनाफा छोटा होने पर भी उसे आईटीआर में दिखाना न भूलें।

आपके कैपिटल गेन की जानकारी ब्रोकर स्टेटमेंट, एआईएस और आईटीआर में एक जैसी होनी चाहिए।

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने की मुख्य बातें

  • अलॉटमेंट मिलने के बाद ही बेच सकते हैं: शेयर आपके डीमैट अकाउंट में आना जरूरी है।
  • ओपनिंग प्राइस खास सेशन में तय होता है: सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने से पहले प्राइस डिस्कवरी होती है।
  • खास प्री-ओपन सेशन में केवल लिमिट ऑर्डर: इससे बेचने की कीमत पर कुछ कंट्रोल मिलता है।
  • मुनाफे में बेचने पर टैक्स: सिर्फ शेयर मिलने पर टैक्स नहीं लगता। बेचने पर हुआ मुनाफा कैपिटल गेन माना जाता है।
  • कीमत तेजी से बदल सकती है: मांग, प्रॉफिट बुकिंग, बाजार का माहौल और शेयर की कीमत इसका असर डाल सकते हैं।
  • कुछ शेयर भी बेच सकते हैं: सभी शेयर एक साथ बेचना जरूरी नहीं है।

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचने के फायदे

  • लिस्टिंग गेन बुक कर सकते हैं: अगर स्टॉक इश्यू प्राइस से ऊपर लिस्ट होता है, तो बेचकर कागजी मुनाफे को असली मुनाफे में बदला जा सकता है।
  • कम समय के उतार-चढ़ाव से बच सकते हैं: कई आईपीओ ऊंचे प्रीमियम पर खुलने के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से गिर सकते हैं।
  • पैसा दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं: शेयर बेचने के बाद पैसा दूसरे स्टॉक, आईपीओ या निवेश में लगाया जा सकता है।
  • भावनाओं में आकर फैसला बदलने से बच सकते हैं: अगर आपका लक्ष्य सिर्फ लिस्टिंग गेन था, तो पहले से तय योजना के हिसाब से बेचना आसान होता है।
  • कुछ शेयर बेच सकते हैं: आप कुछ मुनाफा बुक करके बाकी शेयर होल्ड कर सकते हैं।

आईपीओ में आवेदन करने से पहले उनकी तुलना करना चाहते हैं, तो एलिस ब्लू आईपीओ डैशबोर्ड पर प्राइस बैंड, लिस्टिंग डेट और इश्यू की जानकारी देख सकते हैं।

आईपीओ शेयर तुरंत बेचने के नुकसान

  • स्टॉक इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हो सकता है: हर आईपीओ लिस्टिंग गेन नहीं देता।
  • बेचने की कीमत उम्मीद से कम मिल सकती है: तेजी से बदलती कीमत में मार्केट ऑर्डर कम कीमत पर पूरा हो सकता है।
  • अच्छी कंपनी बहुत जल्दी बेच सकते हैं: कुछ आईपीओ लंबे समय में अच्छा कर सकते हैं, भले पहले दिन मुनाफा कम हो।
  • टैक्स असली मुनाफा कम करता है: एसटीसीजी टैक्स, सेस और दूसरे चार्ज काटने के बाद हाथ में कम पैसा बचता है।
  • एसएमई आईपीओ में खरीददार कम हो सकते हैं: इसलिए मनचाही कीमत पर शेयर बेचना मुश्किल हो सकता है।
  • डर और लालच में गलती हो सकती है: नए निवेशक बार-बार अपना टारगेट बदल सकते हैं या अचानक गिरावट में घबराकर बेच सकते हैं।

नए निवेशकों के लिए जरूरी बातें

  • लिस्टिंग से पहले ही बेचने की कीमत तय करें।
  • कीमत तेजी से बदल रही हो तो लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करें।
  • सिर्फ इसलिए हर आईपीओ में आवेदन न करें क्योंकि हाल के आईपीओ ने अच्छा लिस्टिंग गेन दिया है।
  • आवेदन से पहले कंपनी की कीमत, कारोबार, कर्ज और आईपीओ के पैसे का इस्तेमाल कहां होगा, यह देखें।
  • सिर्फ जीएमपी पर भरोसा न करें।
  • अगर पूरा बेचने को लेकर पक्का नहीं हैं, तो कुछ शेयर बेच सकते हैं।
  • सीडीएसएल टीपिन या शेयर बेचने की मंजूरी पहले से तैयार रखें।
  • मुनाफा निकालते समय सभी चार्ज जोड़ें।
  • आईटीआर में कैपिटल गेन सही तरीके से दिखाएं।
  • बेचने से पहले खर्च का अंदाजा लगाने के लिए एलिस ब्लू ब्रोकरेज कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सकते हैं।

लिस्टिंग के दिन बेचें या आईपीओ शेयर होल्ड करें?

बात

लिस्टिंग के दिन बेचना

लिस्टिंग के बाद होल्ड करना

समय

उसी दिन

कई महीने या साल

मुख्य लक्ष्य

लिस्टिंग गेन कमाना

कंपनी की बढ़त से फायदा लेना

टैक्स

आमतौर पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

12 महीने बाद लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन हो सकता है

खतरा

लिस्टिंग के दिन कीमत में तेज बदलाव

लंबे समय में कंपनी और बाजार से जुड़ा खतरा

किसके लिए सही

कम समय के आईपीओ निवेशक

लंबे समय के निवेशक

फैसला किस आधार पर

लिस्टिंग प्राइस, मांग, बाजार का माहौल

कंपनी का कारोबार, कीमत, कमाई

भावनाओं से जुड़ी चुनौती

लालच और घबराहट से बचना

कीमत में उतार-चढ़ाव के दौरान धैर्य रखना

लिस्टिंग के दिन बेचना उन निवेशकों के लिए सही हो सकता है जिन्होंने मुख्य रूप से लिस्टिंग गेन के लिए आवेदन किया था।

होल्ड करना उन निवेशकों के लिए सही हो सकता है जो कंपनी को समझते हैं और लंबे समय तक कीमत में बदलाव को संभाल सकते हैं।

आईपीओ बेचने की अलग-अलग स्ट्रैटेजी

आप अपने आईपीओ शेयरों के साथ क्या करें, यह इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि आपने आवेदन क्यों किया था।

अगर आपका लक्ष्य लिस्टिंग गेन था, तो आपकी योजना लंबे समय के निवेशक से अलग होगी।

कुछ मुनाफा बुक करें – 

लिस्टिंग के दिन सभी शेयर बेचना जरूरी नहीं है।

आप कुछ शेयर बेच सकते हैं और बाकी होल्ड कर सकते हैं। इससे कुछ मुनाफा पक्का हो जाता है और अगर स्टॉक आगे बढ़ता है तो उसका फायदा भी मिल सकता है।

सभी शेयर बेच दें – 

अगर आपका मुख्य लक्ष्य जल्दी मुनाफा कमाना था, तो अपने तय टारगेट पर पहुंचने के बाद सभी शेयर बेचना सबसे आसान तरीका हो सकता है।

इसके बाद आप पैसा दूसरे निवेश या ट्रेड में लगा सकते हैं।

शेयर होल्ड करें – 

कुछ आईपीओ पहले दिन के बाद भी लंबे समय तक रखने लायक हो सकते हैं।

अगर कंपनी का कारोबार मजबूत है, कमाई लगातार बढ़ रही है और आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है, तो होल्ड करना बेहतर हो सकता है।

स्टॉप-लॉस के साथ होल्ड करें – 

अगर आप शेयर रखना चाहते हैं लेकिन नीचे जाने का नुकसान सीमित रखना चाहते हैं, तो स्टॉप-लॉस मदद कर सकता है।

इसमें आप एक कीमत तय करते हैं। स्टॉक उस कीमत तक गिरने पर सेल ऑर्डर चालू हो जाता है।

लेकिन तेजी से बदलते बाजार में असली बेचने की कीमत थोड़ी अलग हो सकती है।

आपके लक्ष्य के लिए कौन-सा तरीका सही है?

आपका लक्ष्य

सही तरीका

लिस्टिंग गेन कमाना

सभी शेयर बेचें

कुछ मुनाफा बुक करना और बाकी निवेश जारी रखना

कुछ शेयर बेचें

लंबे समय के लिए निवेश

शेयर होल्ड करें

शेयर होल्ड करते हुए नुकसान सीमित रखना

स्टॉप-लॉस लगाएं

आम गलतियां जिनसे बचना चाहिए

  • डीमैट अकाउंट चेक किए बिना आईपीओ शेयर बेचने का ऑर्डर न लगाएं। अलॉटमेंट मिलना और शेयर अकाउंट में आना दो अलग बातें हैं।
  • सिर्फ जीएमपी पर भरोसा न करें। यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है और तेजी से बदल सकता है।
  • तेज उतार-चढ़ाव में मार्केट ऑर्डर लगाते समय सावधान रहें। लिमिट ऑर्डर कीमत पर बेहतर कंट्रोल देता है।
  • ट्रेडिंग शुरू होने से पहले सीडीएसएल टीपिन या शेयर बेचने की मंजूरी तैयार रखें।
  • टैक्स और चार्ज को नजरअंदाज न करें। ₹5,000 का कुल मुनाफा आपका असली मुनाफा नहीं होता क्योंकि इसमें से ब्रोकरेज, दूसरे चार्ज और टैक्स कट सकते हैं।
  • अगर शेयर इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हो, तो सिर्फ नुकसान बुक नहीं करना चाहते इसलिए उसे पकड़े न रहें। कंपनी को दोबारा जांचें।
  • दूसरी तरफ, अच्छी कंपनी के शेयर सिर्फ इसलिए न बेचें क्योंकि बाकी लोग बेच रहे हैं।

आईपीओ बेचने से जुड़े जरूरी शब्द

शब्द

आसान मतलब

आईपीओ इश्यू प्राइस

वह कीमत जिस पर निवेशकों को शेयर दिए जाते हैं

लिस्टिंग प्राइस

पहली कीमत जिस पर स्टॉक ट्रेडिंग शुरू करता है

लिस्टिंग गेन

जब बेचने की कीमत आईपीओ इश्यू प्राइस से ज्यादा हो तो मिलने वाला मुनाफा

एसटीसीजी

12 महीने के अंदर लिस्टेड शेयर बेचने पर होने वाला शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

एसटीटी

स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग से जुड़ा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स

लिमिट ऑर्डर

ऐसा ऑर्डर जिसमें आप कम से कम बेचने की कीमत तय करते हैं

मार्केट ऑर्डर

उस समय उपलब्ध सबसे अच्छी कीमत पर तुरंत बेचने वाला ऑर्डर

सीडीएसएल टीपिन

डीमैट अकाउंट से शेयर बेचने की मंजूरी देने वाला पिन

लिक्विडिटी

शेयर को बिना बड़ी कीमत बदलने के कितनी आसानी से बेचा जा सकता है

कॉन्ट्रैक्ट नोट

ब्रोकर की तरफ से दिया गया दस्तावेज जिसमें ट्रेड और चार्ज की जानकारी होती है

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर किसे बेचने चाहिए?

लिस्टिंग के दिन शेयर बेचना उन निवेशकों के लिए सही हो सकता है जिन्होंने मुख्य रूप से लिस्टिंग गेन के लिए आईपीओ में आवेदन किया था और लिस्टिंग के बाद का खतरा नहीं लेना चाहते।

यह नए निवेशकों के लिए भी सही हो सकता है जिन्हें अच्छा प्रीमियम मिला है और वे रोज स्टॉक पर नजर रखने के बजाय मुनाफा पक्का करना चाहते हैं।

लेकिन अगर आपने कंपनी के कारोबार को समझकर लंबे समय के लिए निवेश किया है, तो सिर्फ लिस्टिंग के दिन के उतार-चढ़ाव की वजह से बेचना सही नहीं हो सकता।

अगर कंपनी की कमाई मजबूत है, उसकी कीमत सही लगती है और लंबे समय में बढ़ने की अच्छी संभावना है, तो सिर्फ पहले दिन की हलचल देखकर शेयर बेचना जरूरी नहीं है।

अच्छा फैसला आईपीओ में आवेदन करने से पहले ही शुरू होता है। कंपनी के बारे में पढ़ें, उसकी कीमत और कारोबार समझें और पहले तय करें कि आप लिस्टिंग गेन के लिए निवेश कर रहे हैं या लंबे समय के लिए।

निष्कर्ष

लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर बेचना अच्छा विकल्प हो सकता है अगर आपका लक्ष्य लिस्टिंग गेन कमाना और कम समय के उतार-चढ़ाव से बचना है।

सबसे जरूरी बात है कि स्टॉक लिस्ट होने से पहले अपनी योजना तैयार रखें।

डीमैट अकाउंट में शेयर आने की जांच करें, इश्यू प्राइस पता रखें, शेयर बेचने की मंजूरी तैयार रखें, सही ऑर्डर चुनें और टैक्स की जानकारी रखें।

12 महीने के अंदर शेयर बेचने पर लिस्टिंग गेन आमतौर पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।

अच्छे फैसले के लिए बेचने की कीमत, नुकसान का खतरा, चार्ज और टैक्स पहले से समझना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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हां। अगर आपको आईपीओ शेयर मिले हैं और वे आपके डीमैट अकाउंट में आ चुके हैं, तो लिस्टिंग के दिन ट्रेडिंग शुरू होने के बाद आप अपने ट्रेडिंग अकाउंट से सेल ऑर्डर लगा सकते हैं।

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आप खास प्री-ओपन सेशन के दौरान लिमिट ऑर्डर लगा सकते हैं।

सामान्य ट्रेडिंग आमतौर पर प्री-ओपन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुरू होती है।

एनएसई के आईपीओ प्री-ओपन सेशन में ऑर्डर लगाना, ऑर्डर मिलाना और बीच का समय शामिल होता है।

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नए निवेशकों के लिए आमतौर पर लिमिट ऑर्डर बेहतर हो सकता है, क्योंकि इसमें आप अपनी कम से कम बेचने की कीमत तय कर सकते हैं।

मार्केट ऑर्डर जल्दी पूरा होता है, लेकिन तेज उतार-चढ़ाव में उम्मीद से कम कीमत पर भी शेयर बिक सकते हैं।

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अगर आप लिस्टिंग के दिन आईपीओ शेयर मुनाफे में बेचते हैं, तो यह आमतौर पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।

सेक्शन 111A के तहत आने वाले योग्य लिस्टेड इक्विटी शेयरों के शॉर्ट-टर्म गेन पर एसटीटी की शर्तें पूरी होने पर 20% टैक्स के साथ लागू सरचार्ज और सेस देना पड़ सकता है।

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अगर आपका लक्ष्य कम समय में लिस्टिंग गेन कमाना था और स्टॉक आपकी तय बेचने की कीमत तक पहुंच गया है, तो लिस्टिंग के दिन बेचना एक विकल्प हो सकता है।

अगर आप कंपनी के कारोबार को अच्छी तरह समझते हैं और लंबे समय के उतार-चढ़ाव को संभाल सकते हैं, तो शेयर होल्ड कर सकते हैं।

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Blog by Aliceblue News Desk

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